श्रीनगर, 10 मार्च: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकी गतिविधियों और राष्ट्रविरोधी मामलों में कथित संलिप्तता को लेकर जल शक्ति (पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग) विभाग के तीन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। प्रशासन ने इसे सुरक्षा के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों को प्रशासनिक हित में बर्खास्त किया गया है। यह कार्रवाई गृह विभाग से प्राप्त संदर्भों के आधार पर की गई।
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में अनंतनाग जिले के बिजबेहड़ा निवासी शौकत अहमद जरगर शामिल हैं, जो जल शक्ति विभाग में डेली रेटेड वर्कर के रूप में कार्यरत थे।
उनके खिलाफ वर्ष 2019 में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में उन पर रणबीर दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए थे। इस मामले में चार्जशीट पहले ही अदालत में दाखिल की जा चुकी है और फिलहाल सुनवाई जारी है।
इसके अलावा किश्तवाड़ जिले में तैनात दो नीड बेस्ड कैजुअल लेबर—लियाकत अली भगवान और कौसर हुसैन भगवान—को भी सेवा से हटा दिया गया है। दोनों जल शक्ति विभाग के पीएचई डिवीजन में कार्यरत थे।
सूत्रों के अनुसार, इन दोनों के खिलाफ वर्ष 2019 में एक मामला दर्ज किया गया था, जिसमें उन पर UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस द्वारा अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
प्रशासन का कहना है कि सरकार किसी भी ऐसे कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाया जाता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए सरकारी सेवा में कोई स्थान नहीं है।
